चूम कर ज़ख़्म फिर से हरा कर दिया क्या लगा था तुम्हें मोजिज़ा कर दिया आप के इश्क़ का क़र्ज़ था मुझ पे जो काटकर हिज्र की शब अदा कर दिया
Related Sher
हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
333 likes
तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
339 likes
पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
208 likes
परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
283 likes
वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
264 likes
More from Rohit Gustakh
ग़म-ए-दुनिया से आगे कुछ नहीं है जहाँ तुम आशनाई कर रही हो
Rohit Gustakh
0 likes
इशारे में उस ने कहा मुस्कुरा कर इशारे से तुम को इशारा करेंगे
Rohit Gustakh
0 likes
अपने इस दिल को पत्थर कर लेंगे हम ख़ुद को तुझ से कमतर कर लेंगे दुनिया बहरी हो जाएगी इक दिन इतनी ख़ामोशी अंदर कर लेंगे
Rohit Gustakh
9 likes
किसी ने कह दिया जंगल बनेगा परिंदे घर बनाते फिर रहे हैं
Rohit Gustakh
13 likes
ये भी मशहूर था कूचे में उस के जिसे तुम लोग पागल कह रहे हो
Rohit Gustakh
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Rohit Gustakh.
Similar Moods
More moods that pair well with Rohit Gustakh's sher.







