कैसी बिपता पाल रखी है क़ुर्बत की और दूरी की ख़ुशबू मार रही है मुझ को अपनी ही कस्तूरी की
sherKuch Alfaaz
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उम्र गुज़री है माँजते ख़ुद को साफ़ हैं पर चमक नहीं पाए डाल ने फूल की तरह पाला ख़ार थे ना महक नहीं पाए
Vishal Bagh
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उस ने मेरे छोटेपन की इस तरह इज़्ज़त रखी मैं ने दीवारें उठाईं उस ने उन पर छत रखी
Kunwar Bechain
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दूरी हुई तो उन सेे क़रीब और हम हुए ये कैसे फ़ासले थे जो बढ़ने से कम हुए
Waseem Barelvi
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दश्त छोड़े हुए अब तो अर्सा हुआ मैं हूँ मजनूँ मगर नाम बदला हुआ मुझ को औरत के दुख भी पता हैं कि मैं एक लड़का हूँ बेवा का पाला हुआ
Rishabh Sharma
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तू ने जिस बात को इज़हार-ए-मुहब्बत समझा बात करने को बस इक बात रखी थी हम ने
Ameer Imam
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