कैसे बद-बख़्त हैं ज़माने में फ़र्ज़ छोड़ा किए कमाने में
Related Sher
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
508 likes
किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
162 likes
तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
1279 likes
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
594 likes
More from Saahir Ubaid Aleemi
है अभी वक़्त बाज़ आ जाओ जान शह राग के पास ठहरी है
Saahir Ubaid Aleemi
0 likes
रात भर घूमते रहे बादल चाँद को चूमते रहे बादल
Saahir Ubaid Aleemi
0 likes
हम ने बस इक हुनर ही पाया है आँधियों में दिया जलाया है
Saahir Ubaid Aleemi
0 likes
मुसलमाँ को मिटाने की हवस काफ़िर के दिल में है मगर ये भूल बैठे हैं क़यामत तक रहेंगे हम
Saahir Ubaid Aleemi
1 likes
कर के क़ुर्बान अपनी ख़ुशियों को ग़म के साए में यार जीता हूँ मय-कदा तो नहीं मगर फिर भी तेरी आँखों का जाम पीता हूँ
Saahir Ubaid Aleemi
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Saahir Ubaid Aleemi.
Similar Moods
More moods that pair well with Saahir Ubaid Aleemi's sher.







