कैसे महदूद हो दो मिसरों में एक मुफ़लिस की ज़िंदगी का दुख
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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इस जहाँ के लिए आँखों में कशिश है ही नहीं मैं किसी और ही मंज़िल का मुसाफ़िर निकला
रूपम कुमार 'मीत'
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ता-क़यामत अमर नहीं होता मैं सुख़नवर अगर नहीं होता
रूपम कुमार 'मीत'
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तैर पाता नहीं था जो लड़का उस को फेंका गया है पानी में
रूपम कुमार 'मीत'
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दिल टूटने का ग़म भी न महसूस कर सके बेहिस बना दिया है ज़माने ने यूँँ हमें
रूपम कुमार 'मीत'
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आज तुलसी में पानी दे कर वो चल पड़ा पेड़ काटने के लिए
रूपम कुमार 'मीत'
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