कल अकेला बैठ कर वो रो रहा था आज "वो" ख़ामोश है "सब" रो रहे हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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तेरी दुनिया काम की नईं मौला तेरा कुन बस एक सियापा है
Lakhan Vaishnav "Aasmaan"
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दुनिया जहाँ की बात से आगे निकल गया वो शख़्स जब वफ़ात से आगे निकल गया उस की ख़ता नहीं कि मुझे छोड़ कर गई मैं ही मेरी बिसात से आगे निकल गया
Lakhan Vaishnav "Aasmaan"
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आज कल इक नदी के तट पर हम बैठ के ज़िंदगी पकड़ते हैं
Lakhan Vaishnav "Aasmaan"
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हम को तितली के आशिक़ की हाए लगी हम उस की माशूका पकड़ा करते थे
Lakhan Vaishnav "Aasmaan"
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बच्चों को मालूम है दुनिया दोज़ख है पैदा होते ही सब रोने लगते हैं
Lakhan Vaishnav "Aasmaan"
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