आज कल इक नदी के तट पर हम बैठ के ज़िंदगी पकड़ते हैं
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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तेरी दुनिया काम की नईं मौला तेरा कुन बस एक सियापा है
Lakhan Vaishnav "Aasmaan"
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हम को तितली के आशिक़ की हाए लगी हम उस की माशूका पकड़ा करते थे
Lakhan Vaishnav "Aasmaan"
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दुनिया जहाँ की बात से आगे निकल गया वो शख़्स जब वफ़ात से आगे निकल गया उस की ख़ता नहीं कि मुझे छोड़ कर गई मैं ही मेरी बिसात से आगे निकल गया
Lakhan Vaishnav "Aasmaan"
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कल अकेला बैठ कर वो रो रहा था आज "वो" ख़ामोश है "सब" रो रहे हैं
Lakhan Vaishnav "Aasmaan"
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बच्चों को मालूम है दुनिया दोज़ख है पैदा होते ही सब रोने लगते हैं
Lakhan Vaishnav "Aasmaan"
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