kal us ki aankh ne kya zinda guftugu ki thi guman tak na hua wo bichhadne wala hai
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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जाने किस मोड़ पे ले आई हमें तेरी तलब सर पे सूरज भी नहीं राह में साया भी नहीं
Ummeed Fazli
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कल उस की आँख ने क्या ज़िंदा गुफ़्तुगू की थी गुमान तक न हुआ वो बिछड़ने वाला है
Ummeed Fazli
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चमन में रखते हैं काँटे भी इक मक़ाम ऐ दोस्त फ़क़त गुलों से ही गुलशन की आबरू तो नहीं
Ummeed Fazli
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ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझ हम अपने शहर में होते तो घर चले जाते
Ummeed Fazli
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आसमानों से फ़रिश्ते जो उतारे जाएँ वो भी इस दौर में सच बोलें तो मारे जाएँ
Ummeed Fazli
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