sherKuch Alfaaz

करे मिलने मिलाने की ही अब जद्दोजहद भी क्यूँ निभाए जो न जाए तो करें ऐसे अहद भी क्यूँ मिले ख़ैरात में गर इश्क़ तो मंज़ूर नफ़रत है दिलों में है ज़हर तो फिर ज़बाँ पर है शहद भी क्यूँ

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