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करो कोशिश तो ख़यालात बदल जाएँगे और ये बदले तो हालात बदल जाएँगे

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जब से हम ज़िंदगी को समझने लगे तब से हम ख़ुद-कुशी को समझने लगे बेवफ़ाई सनम आपने जब से की तब से हम बंदगी को समझने लगे

Aatish Indori

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फंदा-वंदा छोड़ कर मैं दूजा सपना बुन रहा हूँ ख़ुद-कुशी तुझ को नहीं मैं ज़िंदगी को चुन रहा हूँ जान-ए-जानाँ जा रहा हूँ मैं मोहब्बत के शिखर पर आशिक़ी को छोड़ कर मैं बंदगी को चुन रहा हूँ

Aatish Indori

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माना कि धागे पक्के हैं कच्चे नहीं कॉलेज के रिश्ते मगर टिकते नहीं ख़ूब-अच्छे से ये बात सुन ले हर कोई हम मुफ़्त मिल सकते हैं पर सस्ते नहीं

Aatish Indori

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मोहब्बत ने मुझे औक़ात दिखला दी ज़रूरी क्यूँँ है धन ये बात सिखला दी

Aatish Indori

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यूँँ तो कोठियाँ हैं यहाँ बहुत मुझे फिर भी लोग मिले नहीं मैं समझ गया भले देर से बड़े शहर दिल के बड़े नहीं वो हमारे गाँव में आते थे बड़े शहर वाले वो लोग थे कभी फ़ोन उन का लगा नहीं कभी वो पते पे मिले नहीं

Aatish Indori

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