sherKuch Alfaaz

कभी जब मैं ने चाहा आख़िरी मिलना मेरे मिलने पे बोली फिर कभी मिलना कहीं तो मिल ही जाएगी मुहब्बत यार मगर मुश्किल है अच्छी दोस्ती मिलना

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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख

Allama Iqbal

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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं

Azhar Iqbal

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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी

Ali Zaryoun

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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए

Jaun Elia

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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है

Tehzeeb Hafi

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वक़्त के साथ जो कल बदल सकते हैं आज ही मेरे दिल से निकल सकते हैं आप वापस नहीं लौटना चाहते आप बिल्कुल मेरे साथ चल सकते हैं

Neeraj Nainkwal

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तुम जो होते ख़ूब-सूरत होती और भी ज़िंदगी पर रदीफ़ों के बिना भी ग़ज़लें ग़ज़लें होती हैं

Neeraj Nainkwal

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उस ने पूछा ही नहीं तब घर में आने के लिए मैं गया था पास जिस के दिल लगाने के लिए

Neeraj Nainkwal

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चलो उस की तरफ़ से भी इशारे बन गए हैं मेरी पिछली मुहब्बत के किनारे बन गए हैं उछाले थे जो कल की रात उस की ओर मैं ने मेरे जुगनू तो अंबर में सितारे बन गए हैं

Neeraj Nainkwal

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जाना चाहते नहीं मगर जाएँ शायद अब हम रोते-रोते घर जाएँ शायद तेरे जाने से भरे दरिया सूखे हैं हम वक़्त से पहले भी मर जाएँ शायद

Neeraj Nainkwal

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