क़ीमत क्या होगी उन आँखों की यारों जिन की गहराई की कोई नाप नहीं
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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सूरज कस के जलता है पत्थर रोज़ पिघलता है सूख गया दरिया सारा मौसम रोज़ बदलता है
Shivangi Shivi
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सूरज धूप लिए फिरता है रोज़ ज़मीं पर ये गिरता है करने शोर मिरे घावों पे ये बादल मुझ पर घिरता है
Shivangi Shivi
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मैं देख लूँ उसे जी भर के कल ये नज़र न रह जाएगी
Shivangi Shivi
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कितनी भी दिलकश बातें हों चेहरा चेहरा सब मालूम है
Shivangi Shivi
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तिरा ज़माना मुझ को करता है बदनाम ख़ुदा लगता है तू भी इन की साजिश में शामिल है
Shivangi Shivi
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