सूरज कस के जलता है पत्थर रोज़ पिघलता है सूख गया दरिया सारा मौसम रोज़ बदलता है
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पानी आँख में भरकर लाया जा सकता है अब भी जलता शहर बचाया जा सकता है
Abbas Tabish
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इस दुनिया के कहने पर उम्मीद न रक्खो पत्थर रख लो सीने पर उम्मीद न रक्खो
Vishal Singh Tabish
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कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
Dushyant Kumar
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पर्वतों को ज़ख़्म गहरे दे दिए हैं पानियों से पत्थरों पर वार कर के
nakul kumar
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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तन्हाई सी शा में हैं ख़ामोशी दे जाती हैं
Shivangi Shivi
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ताबीरों को ताबानी दे मौला इस शाइ'र को नादानी दे मौला
Shivangi Shivi
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तिरा ज़माना मुझ को करता है बदनाम ख़ुदा लगता है तू भी इन की साजिश में शामिल है
Shivangi Shivi
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महशर का दिन आया है अब तो कर्मा बोलेगा
Shivangi Shivi
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क़ीमत क्या होगी उन आँखों की यारों जिन की गहराई की कोई नाप नहीं
Shivangi Shivi
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