महशर का दिन आया है अब तो कर्मा बोलेगा
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दिन में मिल लेते कहीं रात ज़रूरी थी क्या? बेनतीजा ये मुलाक़ात ज़रूरी थी क्या मुझ सेे कहते तो मैं आँखों में बुला लेता तुम्हें भीगने के लिए बरसात ज़रूरी थी क्या
Abrar Kashif
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एक दिन की ख़ुराक है मेरी आप के हैं जो पूरे साल के दुख
Varun Anand
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कोई होंठों पे उँगली रख गया है उसी दिन से मैं लिखकर बोलता हूँ
Fahmi Badayuni
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फोन भी आया तो शिकवे के लिए फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ रास्ते की मुश्किलें तो जान लूँ आता होगा उस का ठुकराया हुआ
Balmohan Pandey
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मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूब-सूरत है बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम मुझे पता चला वो कितनी ख़ूब-सूरत है
Bashir Badr
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तन्हाई सी शा में हैं ख़ामोशी दे जाती हैं
Shivangi Shivi
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ताबीरों को ताबानी दे मौला इस शाइ'र को नादानी दे मौला
Shivangi Shivi
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तिरा ज़माना मुझ को करता है बदनाम ख़ुदा लगता है तू भी इन की साजिश में शामिल है
Shivangi Shivi
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नाम तुम्हारा लेते हैं जो काम हमारा हो जाता है
Shivangi Shivi
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कोई भी वा'दा कर लो तुम हम तो साथ तुम्हारा देंगे
Shivangi Shivi
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