सूरज धूप लिए फिरता है रोज़ ज़मीं पर ये गिरता है करने शोर मिरे घावों पे ये बादल मुझ पर घिरता है
Related Sher
साथ चलते जा रहे हैं पास आ सकते नहीं इक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं उस की भी मजबूरियाँ हैं मेरी भी मजबूरियाँ रोज़ मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं
Bashir Badr
85 likes
लोग सुन कर वाह-वाही करते हैं हर बार ही रोज़ ही रोता हूँ अब तो मैं किसी सुर-ताल में
nakul kumar
88 likes
इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
87 likes
लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
133 likes
जहाँ से जी न लगे तुम वहीं बिछड़ जाना मगर ख़ुदा के लिए बे-वफ़ाई न करना
Munawwar Rana
85 likes
More from Shivangi Shivi
ताबीरों को ताबानी दे मौला इस शाइ'र को नादानी दे मौला
Shivangi Shivi
0 likes
सूरज कस के जलता है पत्थर रोज़ पिघलता है सूख गया दरिया सारा मौसम रोज़ बदलता है
Shivangi Shivi
0 likes
मस्ती में बहता दरिया हूँ अंबर मुझ को देखा करता
Shivangi Shivi
0 likes
तिरा ज़माना मुझ को करता है बदनाम ख़ुदा लगता है तू भी इन की साजिश में शामिल है
Shivangi Shivi
0 likes
नाम तुम्हारा लेते हैं जो काम हमारा हो जाता है
Shivangi Shivi
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Shivangi Shivi.
Similar Moods
More moods that pair well with Shivangi Shivi's sher.







