khamoshi ke nakhun se chhil jaya karte hain koi phir in zakhmon par aawazen malta hai
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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वो एक अश्क जो हासिल है ज़िंदगानी का तमाम उम्र के मंज़र निचोड़ कर निकला
Ameer Imam
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लुत्फ़ आता है बहुत सोच के मुझ को कि रक़ीब रंगत-ए-लब को तेरी पान समझते होंगे
Ameer Imam
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ख़ुद हुस्न से न पूछिए ता'रीफ़ हुस्न की दीवाने से ये पूछिए दीवाना क्यूँँ हुआ
Ameer Imam
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बे-सबब मरने से अच्छा है कि हो कोई सबब दोस्तों सिगरेट पियो मय-ख़्वारियाँ करते रहो
Ameer Imam
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अब सुलगती है हथेली तो ख़याल आता है वो बदन सिर्फ़ निहारा भी तो जा सकता था
Ameer Imam
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