sherKuch Alfaaz

ख़ामोशी खा गई मेरा कमरा चीख़ता रहता वीरानी से घर मैं भी ख़ूँ थूकना चाहता हूँ कोई तो फारिहा हो मुयस्सर

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ज़बरदस्ती पकड़े हुए हैं तू और मैं कि चल छोड़ देते हैं अब ये मोहब्बत

Jagveer Singh

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केक पे लिखवाया यारों ने तेरा नाम काँपते हाथों से हम ने केक काटा ज़िंदगी के खुल गए थे दोनों ही कान वक़्त ने इक रोज़ मारा ऐसा चाटा

Jagveer Singh

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वही हुआ है जो होना तय था जो तय है आगे वही होना ये मसअला क्यूँँ भला जो तय है वही हुआ उस पे क्या रोना अगर है बस में जो सब ख़ुदा के तो उस के बंदों तुम्हें क्या फ़िक्र हैं रिंद हम होना है जो भी गर हमारा हम से ही वो होना

Jagveer Singh

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ज़मीन पर मनुष्य को ही ख़तरा है मनुष्य से यहाँ-वहाँ मनुष्य डरता फिरता है मनुष्य से ख़ुदा ने भूक और मनुष्य ने बनाया इश्क़ को ख़ुदा का काम ज़्यादा जानलेवा है मनुष्य से

Jagveer Singh

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मुहब्बत को बचाने की यही है आख़िरी इक राह पुरोहित से रहो तुम दूर और मुल्ला से तो बच कर

Jagveer Singh

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