खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए सवाल ये है किताबों ने क्या दिया मुझ को
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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इश्क़ में ये दावा तो नईं है मैं ही अव्वल आऊँगा लेकिन इतना कह सकता हूँ अच्छे नंबर लाऊँगा
Zubair Ali Tabish
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मैं चूमता हूँ तो वो हाथ खींच लेता है उसे पता है ये सीढ़ी कहाँ पे जानी है
Nadir Ariz
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मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के, ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से, मोहब्बत हो गई तुम से
Zubair Ali Tabish
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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