ख़ूब-सूरत साथ बीते वो हमारे पल सभी थे थे मगर गुज़रे हुए बस वो हमारे कल सभी थे
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कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी
Javed Akhtar
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उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
Iftikhar Naseem
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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बिछड़ कर तुम सेे वो दिन ज़िन्दगी में लौट आए हैं तुम्हें अब चाँद में हम देखते हैं और सो जाते हैं
ATUL SINGH
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बताओ मान लूँ कैसे कि ये मुमकिन नहीं है वो सारे ख़्वाब जो देखे थे हम ने सच न होंगे
ATUL SINGH
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तुम्हारी यादें हैं सो कैसे इनको भूल जाएँ हम भला कोई हवा के बिन जिया है और जी सकता है
ATUL SINGH
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जानता हूँ कि हवाएँ तुझे बहकाती हैं जा चराग़ों की तरह तू भी उजाला कर दे
ATUL SINGH
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वो शख़्स मेरे ग़म को समझे भी कैसे आख़िर चेहरे को पढ़ना तो उस को आता ही नहीं हैं
ATUL SINGH
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