ख़ूब-सूरत है सिर्फ़ बाहरस ये इमारत भी आदमी सी है
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बात ये है कि आदमी शाइ'र या तो होता है या नहीं होता
Mahboob Khizan
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वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है माथे पे उस के चोट का गहरा निशान है वो कर रहे हैं इश्क़ पे संजीदा गुफ़्तुगू मैं क्या बताऊँ मेरा कहीं और ध्यान है
Dushyant Kumar
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आदमी देश छोड़े तो छोड़े 'अली' दिल में बसता हुआ घर नहीं छोड़ता एक मैं हूँ कि नींदें नहीं आ रही एक तू है कि बिस्तर नहीं छोड़ता
Ali Zaryoun
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निगाहें फेर ली घबरा के मैं ने वो तुम से ख़ूब-सूरत लग रही थी
Fahmi Badayuni
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दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था तालों की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था
Azhar Faragh
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चारासाज़ो मिरा इलाज करो आज कुछ दर्द में कमी सी है
Azhar Nawaz
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वो भी आख़िर तिरी ता'रीफ़ में ही ख़र्च हुआ मैं ने जो वक़्त निकाला था शिकायत के लिए
Azhar Nawaz
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मैं तो मुद्दत से ग़ैर-हाज़िर हूँ बस मेरा नाम है रजिस्टर में याद करती हैं तुझ को दीवारें शक्ल उभर आई है पलस्तर में
Azhar Nawaz
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फ़रेब दे के उसे जीतना गवारा नहीं अगर वो दिल से हमारा नहीं हमारा नहीं
Azhar Nawaz
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माफ़ कर तो दिया है मगर कहो उन सेे वो थोड़ी देर मेरे सामने से हट जाएँ
Azhar Nawaz
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