वो भी आख़िर तिरी ता'रीफ़ में ही ख़र्च हुआ मैं ने जो वक़्त निकाला था शिकायत के लिए
Related Sher
अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
221 likes
हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
207 likes
अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
197 likes
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
144 likes
इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो कितने सच्चे दिल से झूठी क़स में खाती हो
Tehzeeb Hafi
238 likes
More from Azhar Nawaz
चारासाज़ो मिरा इलाज करो आज कुछ दर्द में कमी सी है
Azhar Nawaz
37 likes
मैं तो मुद्दत से ग़ैर-हाज़िर हूँ बस मेरा नाम है रजिस्टर में याद करती हैं तुझ को दीवारें शक्ल उभर आई है पलस्तर में
Azhar Nawaz
45 likes
माफ़ कर तो दिया है मगर कहो उन सेे वो थोड़ी देर मेरे सामने से हट जाएँ
Azhar Nawaz
40 likes
झील में उस को उतरते देख कर मैं ने सोचा जलपरी बन जाएगी कृष्ण बन कर जब उसे सोचूँगा मैं मेरी धड़कन बाँसुरी बन जाएगी
Azhar Nawaz
49 likes
ख़ूब-सूरत है सिर्फ़ बाहरस ये इमारत भी आदमी सी है
Azhar Nawaz
39 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Azhar Nawaz.
Similar Moods
More moods that pair well with Azhar Nawaz's sher.







