मैं तो मुद्दत से ग़ैर-हाज़िर हूँ बस मेरा नाम है रजिस्टर में याद करती हैं तुझ को दीवारें शक्ल उभर आई है पलस्तर में
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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चारासाज़ो मिरा इलाज करो आज कुछ दर्द में कमी सी है
Azhar Nawaz
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ख़ूब-सूरत है सिर्फ़ बाहरस ये इमारत भी आदमी सी है
Azhar Nawaz
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वो भी आख़िर तिरी ता'रीफ़ में ही ख़र्च हुआ मैं ने जो वक़्त निकाला था शिकायत के लिए
Azhar Nawaz
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माफ़ कर तो दिया है मगर कहो उन सेे वो थोड़ी देर मेरे सामने से हट जाएँ
Azhar Nawaz
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बनता था दिन तुम्हारा कभी देख कर मुझे तुम वक़्त दे रहे हो घड़ी देख कर मुझे
Azhar Nawaz
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