ख़ुदा महफ़ूज़ रक्खे हर बला से तेरी आँखों का सदक़ा दे रहा हूँ
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को
Naseer Turabi
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सुकूँ से जी रहा हूँ हिज्र के दिन तुम्हारी बद-दुआ को सात बोसे
Shamsul Hasan ShamS
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तुम काजल हो मैं काजल की डिबिया हूँ हम दोनों इक साथ ख़रीदे जाएँगे
Shamsul Hasan ShamS
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मेरे जैसा ढूँढ़ रही हो हद होती है पागलपन की
Shamsul Hasan ShamS
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मेरी आँखों ने भी वहशत का सबब जान लिया किसी के दुख पे तुम्हें रोते हुए देखता था
Shamsul Hasan ShamS
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वक़्त लगेगा हम दोनों को लेकिन अच्छे हो जाएँगे
Shamsul Hasan ShamS
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