सुकूँ से जी रहा हूँ हिज्र के दिन तुम्हारी बद-दुआ को सात बोसे
Related Sher
जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
368 likes
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
394 likes
तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
331 likes
माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
296 likes
More from Shamsul Hasan ShamS
वक़्त लगेगा हम दोनों को लेकिन अच्छे हो जाएँगे
Shamsul Hasan ShamS
1 likes
कुछ दिनों से मैं यूँँ परेशाँ हूँ मेरी मिट्टी से क्या बना है मेरा
Shamsul Hasan ShamS
1 likes
कह दिया काफ़िर उसे तो क्या वो काफ़िर हो गया कौन जाने किस के सीने में ख़ुदा मौजूद है
Shamsul Hasan ShamS
1 likes
तुम काजल हो मैं काजल की डिबिया हूँ हम दोनों इक साथ ख़रीदे जाएँगे
Shamsul Hasan ShamS
1 likes
कब तलक उस की जुदाई का करेंगे मातम यार अब हल भी तो करने हैं मसाइल घर के
Shamsul Hasan ShamS
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Shamsul Hasan ShamS.
Similar Moods
More moods that pair well with Shamsul Hasan ShamS's sher.







