कब तलक उस की जुदाई का करेंगे मातम यार अब हल भी तो करने हैं मसाइल घर के
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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तुम काजल हो मैं काजल की डिबिया हूँ हम दोनों इक साथ ख़रीदे जाएँगे
Shamsul Hasan ShamS
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सुकूँ से जी रहा हूँ हिज्र के दिन तुम्हारी बद-दुआ को सात बोसे
Shamsul Hasan ShamS
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मेरी आँखों ने भी वहशत का सबब जान लिया किसी के दुख पे तुम्हें रोते हुए देखता था
Shamsul Hasan ShamS
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मैं इस लिए भी मोहब्बत न कर सका तुम सेे तुम्हारा इश्क़ मेरा रिज़्क़ छीन सकता था
Shamsul Hasan ShamS
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कह दिया काफ़िर उसे तो क्या वो काफ़िर हो गया कौन जाने किस के सीने में ख़ुदा मौजूद है
Shamsul Hasan ShamS
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