sherKuch Alfaaz

खुला फ़रेब-ए-मोहब्बत दिखाई देता है अजब कमाल है उस बे-वफ़ा के लहजे में

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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी

Jaun Elia

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नाप रहा था एक उदासी की गहराई हाथ पकड़कर वापस लाई है तन्हाई वस्ल दिनों को काफ़ी छोटा कर देता है हिज्र बढ़ा देता है रातों की लम्बाई

Tanoj Dadhich

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जो कहता है वैसे करना पड़ता है इतना प्यारा है कि डरना पड़ता है आँखें काली कर देता है उस का दुख सब को ये जुर्माना भरना पड़ता है

Kafeel Rana

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गरेबाँ चाक, धुआँ, जाम, हाथ में सिगरेट शब-ए-फ़िराक़, अजब हाल में पड़ा हुआ हूँ

Hashim Raza Jalalpuri

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जो अपना हिस्सा भी औरों में बाँट देता है इक ऐसे शख़्स के हिस्से में आ गए थे हम

Ismail Raaz

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