ख़ुशी के पेड़ काटे जा रहे हैं बड़ी ज़ालिम ग़मों की आरियाँ हैं
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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तेरे दर पर तेरी ख़ातिर बता ना हमें रोना पड़े अच्छा लगेगा
Akash Gagan Anjaan
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उस की चौखट को चू में बिन अपना तीर्थ अधूरा है औरों की ख़ातिर बस चारों धाम बहुत होते होंगे
Akash Gagan Anjaan
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ज़रा सा भर गए क्या देखिए ना घड़े झगड़ा नदी से कर रहे हैं
Akash Gagan Anjaan
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सपनों के आगे है ज़िम्मेदारी सो घर का राशन पानी देखा करते हैं
Akash Gagan Anjaan
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कुछ ख़्वाब कभी पूरे नहीं होने यहाँ पर बोझिल हैं अगर पलकें तो सामान उतारो तुम जैसों को चाहा था कभी मैं ने ग़ज़ब है आ कर के किसी रोज़ ये एहसान उतारो
Akash Gagan Anjaan
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