ख़्वाहिश का क्या वक़्त बदलने से ही बदल जाती है मंज़िल पास नहीं आती बस दूर निकल जाती है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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पर निकलते बेटियों के देख माँ घबरा गई हर जगह सय्याद बैठा हाथ में पिंजरा लिए
arjun chamoli
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ग़ुबार दिल में रहा ज़ख़्म भर नहीं पाया हुई थी बात मगर बात थी अधूरी सी
arjun chamoli
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मिरे ख़िलाफ़ ही सब दस्तख़त हुए आख़िर मैं चुप रहा तो गुनहगार मुझ को माना है
arjun chamoli
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पता मुझ को तेरा ये दिल मुझी से इश्क़ को लरज़े करूँँ मैं क्या लगी है भीड़ लैलाओं की पहले से
arjun chamoli
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ज़िंदगी का राज़-ओ-इल्म बस है इक तहरीर में वो मिलेगा ज़िंदगी में जो लिखा तक़दीर में
arjun chamoli
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