कि ग़ुर्बत ने तमाचा मारा मुँह पर फिर मोहब्बत करने वाला था मैं पागल सा
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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वो पहाड़ों से यूँँ नीचे देखता है जैसे अब भी बाबा नीचे बैठे होंगे
Amanpreet singh
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तुझे तेरी मोहब्बत की क़सम है अब मिटाना है गुमाँ सब इश्क़ को ले कर
Amanpreet singh
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मुझे कहना नहीं था पर मेरी मानो गले लग कर उसे तो अब भुला लो तुम
Amanpreet singh
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मुझे यारों निकालो इस जहाँ से अब कहीं ये दिल उसे फिर से बुला ना ले
Amanpreet singh
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लड़ाई के लिए ही फिर उसे मैं याद आया था किसी की बात को ले कर वो अरसे बा'द आया था
Amanpreet singh
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