किनारे दो मिलाने में हैं कितनी मुश्किलें सोचो ये पुल दिन भर ही सीने पे बिचारा चोट खाता है
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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साहिब-ए-सख़ा हो तुम, ये भी रहम अता करो मुश्किलों का दौर है, दुआ करो दुआ करो मौत की जकड़ से साँस लौट आएगी भला तुम ख़ुदा का रूप हो, रज़ा करो रज़ा करो
Prashant Beybaar
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तुझ पे मर के हम ने आख़िर अब ये जाना ख़ा-मख़ा ही तुझ को माने ज़िन्दगी हम
Prashant Beybaar
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हैं ज़रूरी काम मुझ को शे'र कहने के सिवा भी सोचना और सोचना, बस सोचना उस को मुसलसल
Prashant Beybaar
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चलो भला है कि हर शख़्स तन्हा है दिल में वगरना कौन किसी का यहाँ सहारा बने
Prashant Beybaar
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कोहरा जो देखा उस ने ठिठराके मुझ सेे पूछा मौसम ये सर्द है या हसरत जली है कोई
Prashant Beybaar
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