किसी मक़ाम पे बे-ध्यानी है मेरी की मैं कभी कभी तेरे हिस्से का बोल देता हूँ
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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तुम ने ही इस को और भी प्यारा बनाया है जिस राब्ते को मैं ने सहारा बनाया है
Vikas Rajput
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तू ने जिस भाव से चादर हमें पकड़ाई है अब यहाँ पाँव पसारे भी नहीं जा सकते
Vikas Rajput
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और यहाँ पर खड़े रहना भी मेरे वश में नहीं आँखों से अब ये नज़ारे भी नहीं जा सकते
Vikas Rajput
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विकास खिड़कियों से देख आए आसमाँ तुम कशिश थी फूल की तो हौसला भी होना था
Vikas Rajput
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ये जिस जहान में बे-ख़्वाबी ले के जाती है वहाँ पे चाहने वाले रुलाए जाते हैं
Vikas Rajput
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