sherKuch Alfaaz

किसी की याद में इतना रहा हूँ मिरी आँखों के आँसू मर गए हैं

More from Puneet Mishra Akshat

जिस को समझा था रौशनी-ए-क़मर शख़्स ऐसा वो आबगीना था उस सेे बिछड़े थे सर्द मौसम में साल का पहला ही महीना था

Puneet Mishra Akshat

1 likes

किसी की चंद रातों का सुधाकर हो नहीं पाया तुम्हारी उर्मियों का मैं, उर-अंतर हो नहीं पाया सरल थीं मन की प्रतिमाएं, मगर अफ़सोस है इतना मैं सब कुछ था तेरा, मेहंदी महावर हो नहीं पाया

Puneet Mishra Akshat

8 likes

ज़ख़्म हम दिल के दिखाएँ तो दिखाएँ कैसे हो गई है जो ख़ता उस को छिपाएँ कैसे मुफ़लिसी देख मेरी जिस ने भुलाया मुझ को ऐसे इन्साँ को वफा़दार बताएँ कैसे

Puneet Mishra Akshat

3 likes

कितने दर्द सहेजे हम ने,तब जा कर ये गीत लिखे हैं तुम क्या जानों इन नयनों की कितनी पीर पुरानी होगी

Puneet Mishra Akshat

6 likes

नए बरस से मुहब्बत नहीं करेंगे हम किसी से इश्क़ में ये आख़िरी दिसंबर है

Puneet Mishra Akshat

3 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Puneet Mishra Akshat.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Puneet Mishra Akshat's sher.