कितने दर्द सहेजे हम ने,तब जा कर ये गीत लिखे हैं तुम क्या जानों इन नयनों की कितनी पीर पुरानी होगी
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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तेरा बनता था कि तू दुश्मन हो अपने हाथों से खिलाया था तुझे तेरी गाली से मुझे याद आया कितने तानों से बचाया था तुझे
Ali Zaryoun
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वो जो गीत तुम ने सुना नहीं मेरी उम्र भर का रियाज़ था मेरे दर्द की थी वो दास्ताँ जिसे तुम हँसी में उड़ा गए
Amjad Islam Amjad
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ये कितनी लाशें सहेजे किसे कहाँ रक्खें कि तंग आ गई है अब ज़मीन लोगों से
Varun Anand
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ज़ख़्म हम दिल के दिखाएँ तो दिखाएँ कैसे हो गई है जो ख़ता उस को छिपाएँ कैसे मुफ़लिसी देख मेरी जिस ने भुलाया मुझ को ऐसे इन्साँ को वफा़दार बताएँ कैसे
Puneet Mishra Akshat
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जिस को समझा था रौशनी-ए-क़मर शख़्स ऐसा वो आबगीना था उस सेे बिछड़े थे सर्द मौसम में साल का पहला ही महीना था
Puneet Mishra Akshat
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नए बरस से मुहब्बत नहीं करेंगे हम किसी से इश्क़ में ये आख़िरी दिसंबर है
Puneet Mishra Akshat
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एक बरस अब पूरा होने वाला है पिछले साल इसी मौसम में बिछड़े थे
Puneet Mishra Akshat
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दिल की धड़कन को मुझ को सुना दीजिए आग चाहत की दिल में लगा दीजिए जाम आँखों में रखने से क्या फ़ाइदा आप नज़रों से मुझ को पिला दीजिए
Puneet Mishra Akshat
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