sherKuch Alfaaz

नए बरस से मुहब्बत नहीं करेंगे हम किसी से इश्क़ में ये आख़िरी दिसंबर है

Related Sher

शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

Rahat Indori

435 likes

कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ

Ali Zaryoun

521 likes

बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं

Umair Najmi

1244 likes

सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ

Jaun Elia

545 likes

मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है

Tehzeeb Hafi

566 likes

More from Puneet Mishra Akshat

जिस को समझा था रौशनी-ए-क़मर शख़्स ऐसा वो आबगीना था उस सेे बिछड़े थे सर्द मौसम में साल का पहला ही महीना था

Puneet Mishra Akshat

1 likes

यहाँ अब कौन करता है ज़माने में वफ़ा उल्फ़त यहाँ उल्फ़त के आड़े जिस्म के व्यापार होते हैं मुझे बीता हुआ अपना ज़माना याद आता है कहाँ फिर से वो बचपन के भला इतवार होते हैं

Puneet Mishra Akshat

6 likes

ज़ख़्म हम दिल के दिखाएँ तो दिखाएँ कैसे हो गई है जो ख़ता उस को छिपाएँ कैसे मुफ़लिसी देख मेरी जिस ने भुलाया मुझ को ऐसे इन्साँ को वफा़दार बताएँ कैसे

Puneet Mishra Akshat

3 likes

कितने दर्द सहेजे हम ने,तब जा कर ये गीत लिखे हैं तुम क्या जानों इन नयनों की कितनी पीर पुरानी होगी

Puneet Mishra Akshat

6 likes

हर दिए को मुयस्सर नहीं रौशनी रात भर एक जुगनू जला रह गया मैं ने रस्में-निशानी में दिल दे दिया और वो था के बस बे-वफ़ा रह गया

Puneet Mishra Akshat

8 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Puneet Mishra Akshat.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Puneet Mishra Akshat's sher.