किसी को हो न हो मुझ को ख़बर है सब तिरे दिल की मिरा ही दिल है जो सुनता रहा है तेरी ख़ामोशी
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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क्या हुईं वो क़ुर्बतें अहबाब को क्या हो गया आते-जाते मिल गईं आँखें तो मिलना हो गया
Dharmesh bashar
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ये ज़िन्दगी तो हम को कभी की भुला चुकी अब क्या करें कि मौत भी आँखें चुराए है
Dharmesh bashar
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यक़ीं मत कीजिए अख़बार की हर बात पर यूँँ ही बहुत मश्कूक होती हैं 'बशर' ये सुर्ख़ियाँ अक्सर
Dharmesh bashar
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उन के सितम हैं कितने जफ़ाओं का क्या शुमार हम क्या बताएँ छोड़िए जाने भी दीजिए
Dharmesh bashar
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क्या मिला ख़ुद को डुबोकर रात की ख़ामोशियों में यार चल ऐसा करें कुछ सुब्ह तक में सनसनी हो
Dharmesh bashar
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