क्या मिला ख़ुद को डुबोकर रात की ख़ामोशियों में यार चल ऐसा करें कुछ सुब्ह तक में सनसनी हो
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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क्या हुईं वो क़ुर्बतें अहबाब को क्या हो गया आते-जाते मिल गईं आँखें तो मिलना हो गया
Dharmesh bashar
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कितने सैयारे ख़ला में घूमते इन पतंगों को उड़ाता कौन है
Dharmesh bashar
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सुर्ख़ी की तलब ज़ेहन पे हो जाती है हावी किरदार बदल देता है अख़बार का साया
Dharmesh bashar
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मेरी क़िस्मत का सितारा है तो पेशानी पे आ कुछ न देंगी ये लकीरें हाथ से बाहर निकल
Dharmesh bashar
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कैसे बचता शिकस्तगी से बदन जलता रहता है तिश्नगी से बदन अब भी सहमा हुआ है कमरे में शब-ए-रफ़्ता की तीरगी से बदन
Dharmesh bashar
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