कितने सैयारे ख़ला में घूमते इन पतंगों को उड़ाता कौन है
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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क्या हुईं वो क़ुर्बतें अहबाब को क्या हो गया आते-जाते मिल गईं आँखें तो मिलना हो गया
Dharmesh bashar
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ये ज़िन्दगी तो हम को कभी की भुला चुकी अब क्या करें कि मौत भी आँखें चुराए है
Dharmesh bashar
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न वो क़हक़हे न वो महफ़िलें न वो मय-कदे की है रौनक़ें हुआ क्या कि देखते-देखते ये निज़ाम सारा बदल गया
Dharmesh bashar
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वुफ़ूर-ए-ग़म में भी कैफ़-ओ-नशात का आलम निज़ाम-ए-दहर में वजह-ए-सुरूर है कोई
Dharmesh bashar
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वो कहाँ रहते हैं जिन के ख़ातिर 'बशर' उम्र भर के लिए हम मुसाफ़िर रहे
Dharmesh bashar
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