कैसे बचता शिकस्तगी से बदन जलता रहता है तिश्नगी से बदन अब भी सहमा हुआ है कमरे में शब-ए-रफ़्ता की तीरगी से बदन
Related Sher
कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
206 likes
कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
163 likes
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे
Waseem Barelvi
97 likes
कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
Dushyant Kumar
91 likes
अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
197 likes
More from Dharmesh bashar
कितने सैयारे ख़ला में घूमते इन पतंगों को उड़ाता कौन है
Dharmesh bashar
3 likes
अब भी कुछ ऐसे हैं गुलज़ार पुराने बाक़ी सामने जिन के है कम ताज़ा गुलाबों की महक सुन लिए कुहना तराने जो किसी बुलबुल के शोर से कम न लगेगी ये परिंदों की चहक
Dharmesh bashar
3 likes
तुझ से भी दूर ज़माने के तक़ाज़ों से भी दूर तेरा दीवाना ज़रा देख कहाँ जा निकला
Dharmesh bashar
4 likes
मौत आई है नजात-ए-ग़म-ए-हस्ती देने जान दे दूँ तो मिरा हक़ भी अदा हो जाए
Dharmesh bashar
4 likes
यादें भी इंतिज़ार भी आहें भी दर्द भी फ़ैयाज़ है वो देखिए क्या क्या नहीं दिया
Dharmesh bashar
4 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Dharmesh bashar.
Similar Moods
More moods that pair well with Dharmesh bashar's sher.







