कोई भी काम ऐसा क्यूँँ करें हम भला ग़ैरों पे ग़ुस्सा क्यूँँ करें हम
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
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उस की चालाकी के ही अब चर्चे हैं जो ख़ुद को नादान बताया करता था
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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ज़हर पीने से क्या होता है ‘अभी’ मर तो लोग इश्क़ में भी जाते हैं
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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उस का ही गुलशन देखो है उजड़ गया जो हम को वीरान बताया करता था
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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क्या क्या वो इंसान बताया करता था हम को वो अनजान बताया करता था
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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लगा लिया है अब तो मरहम भी क्यूँँ मेरे ज़ख़्म भर नहीं जाते
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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