कोई भी ग़ज़ल मेरी मुकम्मल नहीं होती इस को कहीं मुझ सेे मोहब्बत तो नहीं है
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तू मेरी जुस्त जू से वाक़िफ़ है ये मेरे लिए बहुत मुनासिफ है
Aryan Goswami
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मैं तुझ सेे रोज़ छुआ जाऊँ यही चाहत थी, है, रहेगी
Aryan Goswami
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ये नदियाँ दूर तक जाए किनारे कम नहीं होते भला किस के दिलो में तुम कहो की ग़म नहीं होते यूँँ ही हर बात पर रुशवा अगर होने लगोगे तो कहो कैसे संभाले दिल भला क्यूँ हम नहीं रोते
Aryan Goswami
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नई बातें पुराना ग़म सभी को छोड़ सकता हूँ तुम्हीं से प्यार करता हूँ तुम्हीं को छोड़ सकता हूँ इसी एक कस्म कस में हूँ की क्या बोलूँ ना रिस्ता तोड़ सकता हूँ ना रिस्ता जोड़ सकता हूँ
Aryan Goswami
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ग़ज़ल है आत्मा फिर भी नज़ाकत की ज़रूरत है बूढ़ापो के मोहल्ले में शरारत की ज़रूरत है ये दुनिया जान कर भी कुछ नहीं करती मेरे ख़ातिर मुझे उस की ज़रूरत है उसे मेरी ज़रूरत है
Aryan Goswami
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