कुछ मसर्रत के पाक़ लम्हे हैं हासिल-ए-ज़ीस्त है जो मेरे लिए
Related Sher
हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
563 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
164 likes
More from Sumit Panchal
ये फ़रेब-ए-हयात है गोया जिस को हम सब हयात कहते हैं
Sumit Panchal
0 likes
वो मेरे ख़्वाब की दहलीज़ तक तो आया था यहाँ भी वस्ल की सूरत न बनने पाई है
Sumit Panchal
0 likes
मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो फिर मेरे साथ चाहे जैसा हो
Sumit Panchal
0 likes
वा किसी दम मैं अपने लब करता सामने उस के ऐसा कब करता ला दवा था मरज़ मेरा फिर मैं किस से चारागरी तलब करता
Sumit Panchal
0 likes
मेरी हयात के सब से हसीन दिन हैं ये मैं उम्र-ए-ख़िज़्र भी क़ुर्बान इस पे कर दूँगा
Sumit Panchal
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Sumit Panchal.
Similar Moods
More moods that pair well with Sumit Panchal's sher.







