कुछ नहीं हो सका वैसे अब क्या करूँँ जीत के हारा मैं कैसे अब क्या करूँँ होना जो था वहीं हो गया मेरे साथ गिर के यूँँ तो उठा जैसे अब क्या करूँँ
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ज़ुल्म करते हैं हम पे लोग अभी इतना क्यूँ जलते हम से लोग अभी हम ने तो हक़ किसी का खाया नहीं तंज़ कैसे भी देते लोग अभी
Parvez Shaikh
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ज़ुल्म ऐसा न मेरे साथ करें ज़िस्म में रूह भी न बाक़ी रहे
Parvez Shaikh
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वो ज़ालिम ज़रा कुछ तो खौफ़-ए-ख़ुदा कर कि आ सकती हैं अब क़यामत कभी भी
Parvez Shaikh
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वो कोई और हैं उधर ढूँढ़ो जी हुज़ूरी हमें नहीं आती
Parvez Shaikh
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नौकरी भी चली ही गई है यूँ तो ज़िंदगी दर बदर की गई है यूँ तो कोई दुख को मिरे क्यूँ समझता नहीं तंज़ की बस सदा दी गई है यूँ तो
Parvez Shaikh
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