वो कोई और हैं उधर ढूँढ़ो जी हुज़ूरी हमें नहीं आती
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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ज़ुल्म करते हैं हम पे लोग अभी इतना क्यूँ जलते हम से लोग अभी हम ने तो हक़ किसी का खाया नहीं तंज़ कैसे भी देते लोग अभी
Parvez Shaikh
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ज़ुल्म ऐसा न मेरे साथ करें ज़िस्म में रूह भी न बाक़ी रहे
Parvez Shaikh
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ज़िंदगी चल मिरा क़ुसूर बता हिज्र क्यूँ काटना पड़ा मुझ को
Parvez Shaikh
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मिली ना किसी से मुहब्बत कभी भी पड़ी ना किसी की ज़रूरत कभी भी
Parvez Shaikh
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यहीं डूब जाने को जी चाहता है यूँँ आँसू बहाने को जी चाहता है नहीं है जहाँ में हमारा कोई अब हमें मुस्कुराने को जी चाहता है
Parvez Shaikh
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