ज़ुल्म करते हैं हम पे लोग अभी इतना क्यूँ जलते हम से लोग अभी हम ने तो हक़ किसी का खाया नहीं तंज़ कैसे भी देते लोग अभी
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
Tehzeeb Hafi
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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ज़ुल्म ऐसा न मेरे साथ करें ज़िस्म में रूह भी न बाक़ी रहे
Parvez Shaikh
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ज़िंदगी चल मिरा क़ुसूर बता हिज्र क्यूँ काटना पड़ा मुझ को
Parvez Shaikh
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वो ज़ालिम ज़रा कुछ तो खौफ़-ए-ख़ुदा कर कि आ सकती हैं अब क़यामत कभी भी
Parvez Shaikh
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यहीं डूब जाने को जी चाहता है यूँँ आँसू बहाने को जी चाहता है नहीं है जहाँ में हमारा कोई अब हमें मुस्कुराने को जी चाहता है
Parvez Shaikh
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तकब्बुर तू दौलत पे इतना भी मत कर चिपक सकती है तुझ से ग़ुर्बत कभी भी
Parvez Shaikh
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