कुछ नहीं पाया गँवाया मयकशी में था हमारा वास्ता बस लड़खड़ाना
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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उम्र भर हम को यही इक काम दे दो देखने को रोज़ ढलती शाम दे दो
Saurabh
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नहीं होते मुफ़्लिस सुख़न-वर सभी कई साल दिल्ली 'ज़फ़र' की रही
Saurabh
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रहेगा इश्क़ कब तक रूह में यारो यहाँ अब जिस्म को भी घर बनाने दो
Saurabh
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मिली तो नहीं है मगर हाँ बुरी चीज़ होगी वफ़ा भी
Saurabh
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कुछ दिन बा'द तो ये भी न बोला जाएगा जो भी होगा आगे देखा जाएगा
Saurabh
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