kuchh na kahne se bhi chhin jata hai ejaz-e-sukhan zulm sahne se bhi zalim ki madad hoti hai
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
489 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
471 likes
More from Muzaffar Warsi
हर शख़्स पर किया न करो इतना ए'तिमाद हर साया-दार शय को शजर मत कहा करो
Muzaffar Warsi
6 likes
कुछ न कहने से भी छिन जाता है एजाज़-ए-सुख़न ज़ुल्म सहने से भी ज़ालिम की मदद होती है
Muzaffar Warsi
9 likes
वतन की रेत ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा
Muzaffar Warsi
12 likes
ज़िंदगी तुझ से हर इक साँस पे समझौता करूँँ शौक़ जीने का है मुझ को मगर इतना भी नहीं
Muzaffar Warsi
42 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Muzaffar Warsi.
Similar Moods
More moods that pair well with Muzaffar Warsi's sher.







