sherKuch Alfaaz

वतन की रेत ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा

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ये सोचते रहना मुझे पागल ही न कर दे ये सोचते रहना कि मैं पागल तो नहीं हूँ

Aamir Azher

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मैं ने बस इतना पूछा था क्या देखते हो भला मैं ने ये कब कहा था मुझे देखना छोड़ दो गीली मिट्टी की ख़ुशबू मुझे सोने देती नहीं मेरे बालों में तुम उँगलियाँ फेरना छोड़ दो

Tajdeed Qaiser

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तुम अगर साथ देने का वा'दा करो मैं यूँँही मस्त नग़्में लुटाता रहूँ तुम मुझे देख कर मुस्कुराती रहो मैं तुम्हें देख कर गीत गाता रहूँ

Sahir Ludhianvi

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मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूब-सूरत है बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम मुझे पता चला वो कितनी ख़ूब-सूरत है

Bashir Badr

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चाँद चेहरा मुझे क़बूल नहीं अब समझने में कोई भूल नहीं आँख बस आँख ही है झील नहीं होंठ बस होंठ ही हैं फूल नहीं

Sandeep Thakur

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