क्या बैठ जाएँ आन के नज़दीक आप के बस रात काटनी है हमें आग ताप के कहिए तो आप को भी पहन कर मैं देख लूँ मा'शूक़ यूँँ तो हैं ही नहीं मेरी नाप के
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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मिला है अब के इक ऐसा पढ़ा लिखा महबूब जो मेरे दिल के बराबर दिमाग़ रखता है
Farhat Ehsaas
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ऊपर उठती हुई एक गर्म हवा है मिरा दर्द मेरा लहजा कभी फ़रियाद नहीं हो सकता
Farhat Ehsaas
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सुखा ली सबने ही आँखें हवा ए ज़िन्दगी से यहाँ अब भी वही रोना रुलाना चल रहा है
Farhat Ehsaas
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तमाम शहर की ख़ातिर चमन से आते हैं हमारे फूल किसी के बदन से आते हैं
Farhat Ehsaas
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इक रात वो गया था जहाँ बात रोक के अब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के
Farhat Ehsaas
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