मिला है अब के इक ऐसा पढ़ा लिखा महबूब जो मेरे दिल के बराबर दिमाग़ रखता है
Writer
Farhat Ehsaas
@farhat-ehsaas
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4
Sher
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Ghazal
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
ऊपर उठती हुई एक गर्म हवा है मिरा दर्द मेरा लहजा कभी फ़रियाद नहीं हो सकता
sherKuch Alfaaz
ये शहर वो है कि कोई ख़ुशी तो क्या देता किसी ने दिल भी दुखाया नहीं बहुत दिन से
sherKuch Alfaaz
तमाम शहर की ख़ातिर चमन से आते हैं हमारे फूल किसी के बदन से आते हैं
sherKuch Alfaaz
सुखा ली सबने ही आँखें हवा ए ज़िन्दगी से यहाँ अब भी वही रोना रुलाना चल रहा है
sherKuch Alfaaz
सख़्त सर्दी में ठिठुरती है बहुत रूह मिरी जिस्म-ए-यार आ कि बेचारी को सहारा मिल जाए
sherKuch Alfaaz
उस वक़्त पढ़ो जब मैं लफ़्ज़ों में नहीं होता उस वक़्त मेरे मानी आसान निकलते हैं
sherKuch Alfaaz
घास की तरह पड़े हैं हम लोग न बुलंदी है न गहराई है
sherKuch Alfaaz
चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है
sherKuch Alfaaz
ठोकरें खा के सँभलना नहीं आता है मुझे चल मिरे साथ कि चलना नहीं आता है मुझे
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