क्या पता है तुम सभी को ख़ामुशी क्या चीज़ है जानते तो जान जाते ख़ुद-कुशी क्या चीज़ है।
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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कौन कहता है ये दूर मुझ सेे हो तुम तुम सेे रौशन हूँ मैं नूर मुझ सेे हो तुम
Alankrat Srivastava
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ज़िन्दगी की उलझनों की फ़िक्र करना छोड़ कर हम तेरी ज़ुल्फों में उलझने की तमन्ना कर रहे हैं
Alankrat Srivastava
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कर तुम्हारी बात प्यारी चाँद तारों को जलाया जा रहा है तुम नहीं हो पर तुम्हारी कल्पना में गीत गाया जा रहा है
Alankrat Srivastava
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कंठ में तुलसी की माला माथ पर चंदन तिलक है कृष्ण की वो है दुलारी दिल जिसे मैं दे चुका हूँ
Alankrat Srivastava
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हूँ कैसा आदमी संकट में हँसता जा रहा हूँ मैं बुरे हर काम कर के भी सभी को भा रहा हूँ मैं ज़माने भर के दिल को तोड़ के आया हूँ मैं औ अब उन्हीं के दुख को अपना दुख बता कर गा रहा हूँ मैं
Alankrat Srivastava
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