क्यूँ परेशाँ है मुश्किलों से तू प्रेत भी देव को दिखा करते
Related Sher
भूलभुलैया था उन ज़ुल्फ़ों में लेकिन हम को उस में अपनी राहें दिखती थीं आप की आँखों को देखा तो इल्म हुआ क्यूँँ अर्जुन को केवल आँखें दिखती थीं
Ashraf Jahangeer
63 likes
एक नज़र देखते तो जाओ मुझे कब कहा है गले लगाओ मुझे तुम को नुस्ख़ा भी लिख के दे दूँगा ज़ख़्म तो ठीक से दिखाओ मुझे
Zia Mazkoor
95 likes
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
508 likes
कोई तुम्हारा सफ़र पर गया तो पूछेंगे रेल देख के हम हाथ क्यूँ हिलाते हैं
Tehzeeb Hafi
112 likes
इतनी क्यूँ बेचैन है तू इस घनेरी रात में ले मुझे अब देख ले अब चाँद बन आया हूँ मैं
nakul kumar
61 likes
More from Aashish kargeti 'Kash'
याद में रख लिया तवाईफ़ को रात में फिर से सो गया जल्दी
Aashish kargeti 'Kash'
0 likes
वो मुझ से दूर जाने को मुसलसल दर बदलता है कभी घर का पता अपना कभी नंबर बदलता है
Aashish kargeti 'Kash'
0 likes
ख़ास, जिगरी, मान ले मतलूब से हिज्र 'कश' तुझे मंज़ूर है? महबूब से हिज्र
Aashish kargeti 'Kash'
0 likes
मुझ को तो लगता है तबीअत ठीक नहीं ख़ैर बताओं हाल तुम्हारा कैसा है
Aashish kargeti 'Kash'
1 likes
वो किस जगह पे छोड़ जाए क्या ख़बर इस बात से बस वो ही रहता बा-ख़बर हम ने तबह कर ली है अपनी ज़िंदगी उस की गली में जा के फैलाना ख़बर
Aashish kargeti 'Kash'
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Aashish kargeti 'Kash'.
Similar Moods
More moods that pair well with Aashish kargeti 'Kash''s sher.







